पंडित । 'क्रिकेट के भगवान' मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने सोमवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण करने से पहले सचिन तेंदुलकर अपनी पत्नी के साथ संसदीय कार्यमंत्री राजीव शुक्ला के घर गए और वहां से उनके साथ सीधे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष हामिद अंसारी के पास पहुंचे। अंसारी के कक्ष में उन्होंने राज्यसभा के सदस्य की शपथ ली। राज्यसभा में उन्हें 103 नंबर की सीट आवंटित की गई है।किसी से भी कोई सहायता नहीं मांगी
-राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद तेंदुलकर ने ब्लॉग पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सबसे पहले तो यही कहा कि सांसद बनने के लिए उन्होंने किसी से भी कोई सहायता नहीं मांगी और ना ही सिफारिश कराई।
उन्होंने कहा, मैं यहां अपने क्रिकेट करियर की बदौलत पहुंचा हूं और मैं क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा। मैं खेल से जुड़े हर जरूरी पहलू पर बतौर सांसद अपनी भूमिका से न्याय करूंगा। संसद में खेल से संबंधित मुद्दे उठाऊंगा ताकि खेल का विकास हो सके। सचिन ने कहा, मुझे खुशी होगा यदि मैं भविष्य में एक ऐसे इंसान के रूप में जाना जाऊं, जिसने खेल के विकास के लिए कुछ किया।
टेस्ट और वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक रनों के अलावा क्रिकेट के अनेक आसमानी कीर्तिमान रचने वाले तेंदुलकर ऐसे पहले खिलाड़ी हैं, जो राज्यसभा सांसद बने हैं। उनसे पूरे देश और खेल जगत को बड़ी उम्मीद है कि वह महज औपचारिक सासंद न रहते हुए अपने इस पद का खेल और युवाओं के विकास में भरपूर इस्तेमाल करेंगे।
तेंदुलकर को भविष्य में भारत-रत्न से भी नवाजा जा सकता है। सरकार ने जनता की मांग को देखते हुए इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान की वर्ग-श्रेणी में संशोधन कर खेल वर्ग को भी इसमें शामिल किया है।
लोकपाल का मुद्दा उठाएं तेंदुलकर: अन्ना
तेंदुलकर को सांसद बनने पर शुभकामना देते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि तेंदुलकर को अब संसद में लोकपाल की लड़ाई लड़ना चाहिए। अन्ना ने कहा, तेंदुलकर अब संसद में लोकपाल का मुद्दा उठाएं। हमें उम्मीद है कि वे ऐसा करेंगे।
हजारे ने कहा कि सचिन जैसे लोगों को राजनीति में आना चाहिए। टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सचिन से अपील करेंगे कि वह भ्रष्टाचार से लड़ने और राज्यसभा में इसके खिलाफ एक सशक्त कानून बनाने में सहायक साबित होंगे।
मनोनयन को लेकर खूब हुई राजनीति
-तेंदुलकर के राज्यसभा में मनोनयन को लेकर राजनीति खूब हुई। आरोप लगे कि कांग्रेस ने ब्रांड तेंदुलकर को अपने साथ जोड़ने के लिए यह कार्ड चला। तेंदुलकर के सोनिया गांधी से मुलाकात करने के बाद इस बात ने तूल भी पकड़ा, लेकिन तेंदुलकर की आदर्श छवि और उनसे भावनात्मक लगाव के चलते कोई भी जनभावना के खिलाफ नहीं जा पाया।
कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने तर्क दिया कि क्रिकेट से संन्यास के बाद ही तेंदुलकर संसद में बनें तो बेहतर होता। कुछ ने कहा, भारत-रत्न मिलने के बाद ऐसा होता तो अधिक बेहतर होता।
